
हनुमानजी क्यों लगाते हैं सिंदुर, जानिए कहानी

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हिंदू धर्म में सिंदूर को सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। पूजा-पाठ में भी इसका विशेष महत्व है। विशेष रूप से हनुमान जी को सिंदूर का पूरा चोला चढ़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी को सिंदूर इतना प्रिय क्यों है? इसके पीछे एक बेहद भावुक कथा छिपी है।
पौराणिक कथा: जब हनुमान जी ने पूरे शरीर पर लगाया सिंदूर
रामचरितमानस के अनुसार, जब भगवान श्री राम लंका विजय के पश्चात अयोध्या लौट आए, तब एक दिन हनुमान जी माता सीता के कक्ष में पहुंचे। वहां उन्होंने माता सीता को अपनी मांग में लाल रंग का सिंदूर लगाते देखा।
माता सीता से जिज्ञासा
हनुमान जी ने उत्सुकता से पूछा, "माता, यह लाल रंग की वस्तु क्या है जिसे आप अपनी मांग में सजा रही हैं?" माता सीता ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, "पुत्र, यह सौभाग्य का प्रतीक सिंदूर है। इसे लगाने से मुझे श्री राम का स्नेह प्राप्त होता है और उनकी आयु लंबी होती है।"
प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य भक्ति
यह सुनकर हनुमान जी ने विचार किया कि यदि चुटकी भर सिंदूर से प्रभु की आयु लंबी होती है, तो क्यों न मैं पूरे शरीर पर ही सिंदूर लगा लूं। इससे मेरे प्रभु अमर हो जाएंगे और मुझे उनका अत्यधिक स्नेह प्राप्त होगा। हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर को सिंदूर से रंग लिया और इसी अवस्था में भगवान राम की सभा में पहुंच गए।
प्रभु श्री राम का भावुक होना
जब श्री राम ने हनुमान जी को इस रूप में देखा, तो वे हैरान रह गए। कारण पूछने पर हनुमान जी ने बड़ी सरलता से पूरी बात बता दी। उनकी निस्वार्थ भक्ति को देखकर प्रभु श्री राम भाव-विभोर हो गए और उन्हें गले से लगा लिया। मान्यता है कि उसी समय से हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने का वैज्ञानिक कारण
धार्मिक आस्था के साथ-साथ हनुमान जी की प्रतिमा पर सिंदूर का चोला चढ़ाने के पीछे कुछ व्यावहारिक और वैज्ञानिक कारण भी हैं:
- प्रतिमा का संरक्षण: सिंदूर और तेल का लेपन करने से प्रतिमा का क्षरण (Erosion) नहीं होता और वह लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।
- सुंदरता और स्पष्टता: चोला चढ़ाने से प्रतिमा की सुंदरता बढ़ती है और हनुमान जी का प्रतिबिंब साफ दिखाई देता है।
- एकाग्रता: प्रतिमा के स्पष्ट रूप से दिखने के कारण भक्तों को ध्यान लगाने और दर्शन करने में आसानी होती है, जिससे उनकी आस्था और सुदृढ़ होती है।
निष्कर्ष
हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करना उनकी कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग माना जाता है। यह न केवल उनकी भक्ति का प्रतीक है, बल्कि भक्त और भगवान के बीच के अटूट प्रेम को भी दर्शाता है। जो भी भक्त उन्हें सच्चे मन से सिंदूर अर्पित करता है, बजरंग बली उसके सभी संकट हर लेते हैं।
लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक
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