108 दिव्य नामों से करें महाशिव की विशेष पूजा

108 दिव्य नामों से करें महाशिव की विशेष पूजा

महाशिवरात्रि के पावन और अलौकिक पर्व पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए शास्त्रों में कई विशेष तरीके बताए गए हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत प्रभावशाली और अचूक तरीका है—शिव अष्टोत्तर शतनामावली (Shiva Ashtottara Shatanamavali) का पूर्ण श्रद्धा के साथ पाठ करना। सावन के सोमवार और महाशिवरात्रि पर इस नामावली का पाठ करने से जातक के जीवन के सभी संकट स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।

शिव अष्टोत्तर शतनामावली: 108 दिव्य नामों की महिमा

सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथ **रुद्राष्टाध्यायी** में भगवान शिव के इन विशेष और जाग्रत नामों का उल्लेख विस्तार से किया गया है। शिव अष्टोत्तर शतनामावली का सरल भावार्थ है—भगवान शिव के 108 पवित्र और कल्याणकारी नाम। ये प्रत्येक नाम महादेव के एक विशेष गुण, उनकी असीमित शक्ति, ब्रह्मांडीय स्वरूप और उनके शांत व रौद्र रूप को प्रकट करते हैं।

108 अंक का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व

सनातन संस्कृति में 108 को सबसे पवित्र, शुभ और चमत्कारी अंक माना गया है। रुद्राष्टाध्यायी के अनुसार, इन 108 नामों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से साधक के शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, मानसिक तनाव दूर होता है और उच्च आध्यात्मिक चेतना की प्राप्ति होती है।

महाशिवरात्रि पर रुद्राष्टाध्यायी के अनुसार विशेष पूजा विधि

रुद्राष्टाध्यायी में इस दिव्य पूजा को पूर्ण फलदायी बनाने के लिए एक विशेष विधान और नियम बताया गया है, जिसका पालन प्रत्येक शिव भक्त को अवश्य करना चाहिए:
  • बिल्व पत्र अर्पण नियम: शिव अष्टोत्तर शतनामावली के प्रत्येक नाम का स्पष्ट उच्चारण करने के साथ ही शिवलिंग पर एक अखंडित (बिना कटा-फटा) ताज़ा बिल्व पत्र (बेलपत्र) अर्पित करना चाहिए। उदाहरण के लिए, "ॐ शिवाय नमः" बोलते हुए पहला बेलपत्र चढ़ाएं, फिर "ॐ महेश्वराय नमः" बोलते हुए दूसरा बेलपत्र चढ़ाएं।
  • महा पूजा की फलश्रुति: ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस विशिष्ट विधि से महाशिवरात्रि या सावन के सोमवार को पूजा करने पर भगवान आशुतोष अत्यंत प्रसन्न होते हैं। वे भक्त के जीवन की सभी अड़चनों, दरिद्रता और रोगों को हरकर उनके समस्त रुके हुए कार्यों को सिद्ध करने का दिव्य आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

भगवान शिव के 108 नाम: श्रीशिवाष्टोत्तरशतनामावलिः

हिंदू धर्म में महादेव के इन नामों का जाप या श्रवण करना परम कल्याणकारी माना गया है। यहाँ भगवान शिव के 108 पवित्र नामों की पूरी और प्रामाणिक सूची दी गई है, जिसका पाठ करने से सुख, समृद्धि, शांति और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है:
  1. ॐ शिवाय नमः।
  2. ॐ महेश्वराय नमः।
  3. ॐ शम्भवे नमः।
  4. ॐ पिनाकिने नमः।
  5. ॐ शशिशेखराय नमः।
  6. ॐ वामदेवाय नमः।
  7. ॐ विरूपाक्षाय नमः।
  8. ॐ कपर्दिने नमः।
  9. ॐ नीललोहिताय नमः।
  10. ॐ शङ्कराय नमः।
  11. ॐ शूलपाणिने नमः।
  12. ॐ खट्वाङ्गिने नमः।
  13. ॐ विष्णुवल्लभाय नमः।
  14. ॐ शिपिविष्टाय नमः।
  15. ॐ अम्बिकानाथाय नमः।
  16. ॐ श्रीकण्ठाय नमः।
  17. ॐ भक्तवत्सलाय नमः।
  18. ॐ भवाय नमः।
  19. ॐ शर्वाय नमः।
  20. ॐ त्रिलोकेशाय नमः।
  21. ॐ शितिकण्ठाय नमः।
  22. ॐ शिवाप्रियाय नमः।
  23. ॐ उग्राय नमः।
  24. ॐ कपालिने नमः।
  25. ॐ कामारये नमः।
  26. ॐ अन्धकासुरसूदनाय नमः।
  27. ॐ गङ्गाधराय नमः।
  28. ॐ ललाटाक्षाय नमः।
  29. ॐ कालकालाय नमः।
  30. ॐ कृपानिधये नमः।
  31. ॐ भीमाय नमः।
  32. ॐ परशुहस्ताय नमः।
  33. ॐ मृगपाणये नमः।
  34. ॐ जटाधराय नमः।
  35. ॐ कैलासवासिने नमः।
  36. ॐ कवचिने नमः।
  37. ॐ कठोराय नमः।
  38. ॐ त्रिपुरान्तकाय नमः।
  39. ॐ वृषाङ्काय नमः।
  40. ॐ वृषभारूढाय नमः।
  41. ॐ भस्मोद्धूलितविग्रहाय नमः।
  42. ॐ सामप्रियाय नमः।
  43. ॐ स्वरमयाय नमः।
  44. ॐ त्रयीमूर्तये नमः।
  45. ॐ अनीश्वराय नमः।
  46. ॐ सर्वज्ञाय नमः।
  47. ॐ परमात्मने नमः।
  48. ॐ सोमसूर्याग्निलोचनाय नमः।
  49. ॐ हविषे नमः।
  50. ॐ यज्ञमयाय नमः।
  51. ॐ सोमाय नमः।
  52. ॐ पञ्चवक्त्राय नमः।
  53. ॐ सदाशिवाय नमः।
  54. ॐ विश्वेश्वराय नमः।
  55. ॐ वीरभद्राय नमः।
  56. ॐ गणनाथाय नमः।
  57. ॐ प्रजापतये नमः।
  58. ॐ हिरण्यरेतसे नमः।
  59. ॐ दुर्धर्षाय नमः।
  60. ॐ गिरीशाय नमः।
  61. ॐ गिरिशाय नमः।
  62. ॐ अनघाय नमः।
  63. ॐ भुजङ्गभूषणाय नमः।
  64. ॐ भर्गाय नमः।
  65. ॐ गिरिधन्विने नमः।
  66. ॐ गिरिप्रियाय नमः।
  67. ॐ कृत्तिवाससे नमः।
  68. ॐ पुरारातये नमः।
  69. ॐ भगवते नमः।
  70. ॐ प्रमथाधिपाय नमः।
  71. ॐ मृत्युञ्जयाय नमः।
  72. ॐ सूक्ष्मतनवे नमः।
  73. ॐ जगद्व्यापिने नमः।
  74. ॐ जगद्गुरुवे नमः।
  75. ॐ व्योमकेशाय नमः।
  76. ॐ महासेनजनकाय नमः।
  77. ॐ चारुविक्रमाय नमः।
  78. ॐ रुद्राय नमः।
  79. ॐ भूतपतये नमः।
  80. ॐ स्थाणवे नमः।
  81. ॐ अहिर्बुध्न्याय नमः।
  82. ॐ दिगम्बराय नमः।
  83. ॐ अष्टमूर्तये नमः।
  84. ॐ अनेकात्मने नमः।
  85. ॐ सात्त्विकाय नमः।
  86. ॐ शुद्धविग्रहाय नमः।
  87. ॐ शाश्वताय नमः।
  88. ॐ खण्डपरशवे नमः।
  89. ॐ अजाय नमः।
  90. ॐ पाशविमोचकाय नमः।
  91. ॐ मृडाय नमः।
  92. ॐ पशुपतये नमः।
  93. ॐ देवाय नमः।
  94. ॐ महादेवाय नमः।
  95. ॐ अव्ययाय नमः।
  96. ॐ हरये नमः।
  97. ॐ भगनेत्रभिदे नमः।
  98. ॐ अव्यक्ताय नमः।
  99. ॐ दक्षाध्वरहराय नमः।
  100. ॐ हराय नमः।
  101. ॐ पूषदन्तभिदे नमः।
  102. ॐ अव्यग्राय नमः।
  103. ॐ सहस्राक्षाय नमः।
  104. ॐ सहस्रपदे नमः।
  105. ॐ अपवर्गप्रदाय नमः।
  106. ॐ अनन्ताय नमः।
  107. ॐ तारकाय नमः।
  108. ॐ परमेश्वराय नमः।
॥ इति श्रीशिवाष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्ण ॥
निष्कर्ष: महाशिवरात्रि के दिन इस नामावली का पाठ जीवन के बड़े से बड़े कष्ट को टालने की क्षमता रखता है। यदि आप पूरी शतनामावली का पाठ करने में असमर्थ हैं, तो शांतिपूर्वक इसे सुनना भी उतना ही प्रभावशाली माना जाता है। पूजा के अंत में महादेव को ऋतु फल और मखाने की खीर का भोग लगाकर आरती अवश्य करें।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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