स्कंदमाता की पूजा से मिलेगा संतान सुख

स्कंदमाता की पूजा से मिलेगा संतान सुख

स्कंदमाता की पूजा से मिलेगा संतान सुख

नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंद माता की पूजा की जाती है। माता पार्वती को यह नाम तब मिला, जब वे स्कंद यानी कार्तिकेय की माता बनी। इस साल स्कंद माता की पूजा का दिन 2 अप्रेल 2025 है। माता की पूजा से साहस, शक्ति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है। देश के कुछ क्षेत्र में स्कंदमाता को षष्ठी देवी के नाम से भी जाना जाता है। देवी भागवत पुराण के अनुसार षष्ठी देवी को बच्चों की रक्षक कहा जाता है। साथ ही जीवन में संतान संबंधी किसी भी समस्या के लिए स्कंदमाता की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है।

माता का स्वरूप

स्कंदमाता का स्वरूप बेहद अद्भुत और आश्चर्य से भरा हुआ है। माता की सवारी शेर है। वे हमेशा ही स्कंद को गोद में बैठाकर रखती हैं। दो भुजाओं से कमल पुष्प पकड़ रखे हैं। उनकी वे वरमुद्रा में भी हैं। कई बार वे पद्मासन मुद्रा में भी बैठी दिखाई देती हैं। कुछ चित्रों में उन्हें कमल पर बैठे हुए भी दिखाया गया है। कुछ जगहों पर वे शेर पर सवार दिखाई देती हैं।

देवी स्कंदमाता का मंत्र

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया । शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ॥

स्कंदमाता की पूजन विधि

  •  नवरात्रि के पांचवें दिन माता की पूजा से पहले स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  •  स्नान के बाद माता की पूजा का संकल्प लें।
  •  माता की पूजा के पहले श्रीगणेश और कार्तिकेय की पूजा करें। भगवान श्री गणेश और कार्तिकेय के मंत्रों की एक माला का जाप भी कर सकते हैं।
  •  माता और स्कंद को मौसमी फल, खीर और हलवे का भोग लगाएं।
  •  देवी स्कंदमाता की पंचोपचार पूजा करना बहुत शुभ होता है।
  •  पूजा के बाद दुर्गासप्तशती का पाठ करना अच्छा होता है।

पूजा के लाभ

  • स्कंदमाता की कृपा से जीवन में संतान संबंधी समस्या दूर होती है।
  •  माता बुध और मंगल ग्रह की कृपा प्राप्त होती है।
  •  माता की कृपा से आत्मविश्वास बढ़ता है।
  •  घर में सुख और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
  •  विरोधी भी मित्र बन जाते हैं।

षष्ठी देवी का रूप है स्कंदमाता

देश के कई जगहों पर स्कंदमाता को षष्ठी देवी का रूप माना जाता है। षष्ठी देवी गर्भ सुरक्षा प्रदान करती है। वे नवजात बच्चों को बुरी नजर और ग्रह बाधाओं से बचाती है। यदि जीवन में संतान संबंधी किसी भी समस्या से परेशान हैं, तो स्कंदमाता की पूजा से जरूर लाभ मिलता है।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

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