धनतेरस पर यम दीपदान - दो पौराणिक कहानियां

धनतेरस पर यम दीपदान - दो पौराणिक कहानियां

कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानी धन त्रयोदशी (धनतेरस) पर यम दीपदान करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन यमराज के निमित्त दीप जलाने से व्यक्ति अकाल मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है। यहाँ हम यम दीपक से जुड़ी दो प्रमुख पौराणिक कथाओं और इसकी सही विधि के बारे में जानेंगे।

यम दीपदान से जुड़ी पौराणिक कथाएं

शास्त्रों में यमराज को प्रसन्न करने और जीवन की रक्षा के लिए दो कथाओं का विशेष वर्णन मिलता है:

1. राजकुमार हेम और यमदूतों की कथा

एक बार यमराज ने अपने दूतों से पूछा कि क्या कभी उन्हें किसी के प्राण हरते समय दया आई? यमदूतों ने राजकुमार हेम की कथा सुनाई। ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि विवाह के चौथे दिन राजकुमार की मृत्यु हो जाएगी। नियति के अनुसार विवाह के चौथे दिन ही राजकुमार की मृत्यु हो गई और उनकी पत्नी का विलाप देखकर यमदूतों का हृदय कांप उठा। यमदूतों के पूछने पर यमराज ने उपाय बताया कि जो व्यक्ति धनतेरस की शाम को मेरे निमित्त दीपदान करेगा, उसे और उसके परिवार को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

2. राजा हिम के पुत्र और पतिव्रता पत्नी की कथा

दूसरी कथा के अनुसार, राजा हिम के पुत्र की मृत्यु भी विवाह के चौथे दिन निश्चित थी। लेकिन उनकी पत्नी मां लक्ष्मी की अनन्य भक्त थी। विवाह के चौथे दिन उसने पूरे महल को दीपों से सजा दिया और भजन गाने लगी। जब यमराज सर्प का रूप धारण कर महल में आए, तो दीपों की रोशनी से उनकी आंखें चौंधिया गईं और वे भजनों में खो गए। इस प्रकार मृत्यु का समय निकल गया और राजकुमार के प्राण बच गए।

यम दीपदान 2025: तिथि और शुभ समय

साल 2025 में यम दीपदान का पवित्र दिन 18 अक्टूबर को होगा। इस दिन सूर्यास्त के बाद यमराज के लिए दीप प्रज्वलित करना अत्यंत शुभ फलदायी रहेगा।

यम दीपक जलाने की सही विधि

यम दीपदान करते समय शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करना आवश्यक है:
  • समय: यह दीप सूर्यास्त के बाद, घर के सभी सदस्यों के भोजन करने के पश्चात सोते समय जलाया जाता है।
  • दीपक का प्रकार: इस कार्य के लिए पुराने मिट्टी के दीपक का इस्तेमाल करें।
  • सामग्री: दीपक में सरसों का तेल डालें और रुई की बत्ती बनाएं।
  • दिशा: दीपक को घर से बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कूड़े के ढेर या नाली के पास रखें।
  • सावधानी: दीपक रखने के बाद थोड़ा जल चढ़ाएं और बिना पीछे मुड़कर देखे घर के अंदर आ जाएं।

यम दीपदान मंत्र

दीप जलाते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए:
मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यज: प्रीतयामिति।।

निष्कर्ष

धनतेरस के दिन यम दीपदान केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा और दीर्घायु की प्रार्थना है। दक्षिण दिशा में जलाया गया यह एक दीपक यमराज को प्रसन्न कर घर से अकाल मृत्यु के संकट को दूर रखता है।

लेखक के बारे में: टीम त्रिलोक

त्रिलोक , वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और धार्मिक अध्ययनों के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) की एक टीम है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संदर्भ के समन्वय पर केंद्रित, त्रिलोक टीम ग्रहों के प्रभाव, आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सनातन धर्म की परंपराओं पर गहन और शोध-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

प्रामाणिकता के प्रति समर्पित, इस टीम में प्रमाणित ज्योतिषी और वैदिक विद्वान शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक लेख शास्त्र-सम्मत और तथ्यपरक हो। सटीक राशिफल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक पर्वों की विस्तृत जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए त्रिलोक एक विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत है।

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